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कविता : शिक्षक

म. नुरुल होदा , विशिष्ट शिक्षक की शानदार रचना

शिक्षक

प्रकाश की ओर ले जाने वाला,
अंधेरा दूर भगाने वाला,
ब्रह्मा–विष्णु कहलाने वाला,
मानवता का दीप जलाने वाला,
ये शिक्षक हैं, सम्मान करो,
मत इनका अपमान करो।।

ये राष्ट्र के निर्माता हैं,
नौनिहालों के भाग्य विधाता हैं।
ये कौटिल्य हैं, गुरु नानक हैं,
विकास के ये मानक हैं।
इनको तुम प्रणाम करो,
उज्ज्वल भविष्य निर्माण करो।।

जीवन जीने की कला सिखायें,
दरिद्रता से छुटकारा दिलायें,
समाज का नव निर्माण करें,
राष्ट्र को समृद्ध बनायें।।
लेकिन जब शिक्षक कर्तव्य-पथ से डगमगाता है,
तो समूचा राष्ट्र अंधकार में डूब जाता है।
इसलिए हे गुरु! कर्तव्य की लौ को जलाए रखीए
ज्ञान से राष्ट्र को सजाए रखीए।।

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